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मदरहुड विश्वविद्यालय, रुड़की में ‘प्रतिस्पर्धा–2026’ का भव्य आगाज़, खेल भावना से गूंजा परिसर 25 प्रतियोगिताएं, 209 टीमें—जोश और जुनून के साथ शुरू हुई ‘प्रतिस्पर्धा–2026’

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मदरहुड विश्वविद्यालय, रुड़की में ‘प्रतिस्पर्धा–2026’ का भव्य आगाज़, खेल भावना से गूंजा परिसर


25 प्रतियोगिताएं, 209 टीमें—जोश और जुनून के साथ शुरू हुई ‘प्रतिस्पर्धा–2026’




विनीत त्यागी (रुड़की)।  मदरहुड विश्वविद्यालय, रुड़की के क्रीड़ा प्रांगण में आयोजित वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता ‘प्रतिस्पर्धा–2026’ का भव्य शुभारंभ हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में हुआ। उद्घाटन समारोह में विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। पूरा परिसर खेल भावना और जोश से सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिभागियों एवं संकाय सदस्यों के एकत्रीकरण से हुआ। इसके बाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० (डॉ०) नरेंद्र शर्मा ने मुख्य अतिथि ‘हिंद केसरी’ और ‘भारत केसरी’ ख़िताब से सम्मानित तथा अर्जुन पुरस्कार विजेता सुभाष वर्मा उर्फ महाबली सुभाष का स्वागत किया। दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना की मनोहारी नृत्य प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि को पौधा, अंगवस्त्र, प्रतीकचिह्न के रूप में गदा एवं पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया।



खेल से होता है सर्वांगीण विकास: कुलपति

अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कुलपति प्रो० (डॉ०) नरेंद्र शर्मा ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि खेल हमें अनुशासन, समय-प्रबंधन, धैर्य और टीम भावना का पाठ पढ़ाते हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प से मिलती है। हार-जीत दोनों ही जीवन के महत्वपूर्ण पक्ष हैं—हार आत्ममंथन का अवसर देती है, जबकि जीत आत्मविश्वास को सुदृढ़ करती है। उन्होंने स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।




खेल जीवन का अभिन्न अंग: मुख्य अतिथि

मुख्य अतिथि सुभाष वर्मा ने कहा कि खेल केवल शारीरिक गतिविधि नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और वैश्विक सद्भावना का सशक्त माध्यम हैं। मैदान में सीखा गया अनुशासन, समर्पण और टीमवर्क जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है।



उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धात्मक युग में शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है, और खेल युवाओं में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता तथा सकारात्मक सोच का विकास करते हैं। 


25 प्रतियोगिताएं, 209 दल लेंगे हिस्सा

विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, छात्र कल्याण प्रो० कृष्णपाल ने स्वागत भाषण में बताया कि ‘प्रतिस्पर्धा–2026’ के अंतर्गत कुल 25 प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें विभिन्न संकायों के 209 दल भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ० लता आर्या ने किया। शपथ ग्रहण समारोह में प्रतिभागियों ने निष्पक्षता और खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में भाग लेने की शपथ ली। कुलपति द्वारा प्रतियोगिता के ‘मीट ओपन’ की घोषणा के साथ ही गुब्बारे छोड़े गए और पूरा वातावरण उत्साह से गूंज उठा।



मशाल दौड़ और एथलेटिक्स से हुई शुरुआत

उद्घाटन अवसर पर मशाल दौड़ का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के कुश्ती खिलाड़ी महाशुभ ने मशाल प्रज्वलित कर दौड़ की शुरुआत की। विभिन्न संकायों के प्रतिनिधि धावकों से गुजरती हुई मशाल अंत में कुलपति और मुख्य अतिथि को सौंपी गई, जिन्होंने इसे खेल प्रांगण में स्थापित किया। राष्ट्रगान के साथ उद्घाटन सत्र का समापन हुआ।

इसके बाद कुलपति और मुख्य अतिथि ने प्रतिभागियों से परिचय प्राप्त कर हरी झंडी दिखाकर 200 मीटर दौड़ (बालक एवं बालिका वर्ग) से एथलेटिक प्रतियोगिताओं का शुभारंभ किया। दिनभर विभिन्न ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धाओं के साथ वॉलीबॉल प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट से खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन होता रहा।



‘प्रतिस्पर्धा–2026’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि खेल गतिविधियां विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, ऊर्जा और खेल भावना का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

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